Thursday, September 15, 2011

Subject Situation

सूरते-हाल

सूरते-हाल ऐसे हैं क्या कीजिये ?
अब तो इस मर्ज की कुछ दवा कीजिये ?

इससे पहले कि हो जाये तर्के-अहद,
आप ही अब कोई फैसला कीजिये.

जिनकी आँखों में गैरत का पानी नहीं,
उन निगाहों से कैसे बचा कीजिये ?

आदमी अपनी नीयत से मजबूर है,
उससे गिरगिट भी डरता है क्या कीजिये ?

इस ज़माने का ऐसा ही दस्तूर है,
अब ये दस्तूर बदले दुआ कीजिये ?

'क्रान्त' फिर से तमन्ना जबाँ हो सके,
ऐसा कुछ दर्द दिल से अता कीजिये ?
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तर्के-अहद = प्रतिज्ञा-भंग, अता=अभिव्यक्त

3 comments:

नीरज द्विवेदी said...

फिर से तमन्ना जबाँ हो सके,
ऐसा कुछ दर्द दिल से अता कीजिये ?

Waah ...

Life is Just a Life
.

Anamikaghatak said...

satik rachana

ZEAL said...

आदमी अपनी नीयत से मजबूर है,
उससे गिरगिट भी डरता है क्या कीजिये ?...

Great creation !

.