Friday, July 22, 2011

tulsi eulogy

तुलसी स्तवन

तुलसी ने मानस लिखा था जब जाति-पाँति-सम्प्रदाय-ताप से धरम-धरा झुलसी.
झुलसी धरा के त्रण-संकुल पे मानस की पावसी-फुहार से हरीतिमा -सी हुलसी.
हुलसी हिये में हरि-नाम की कथा अनन्त सन्त के समागम से फूली-फली कुल-सी.
कुल-सी लसी जो प्रीति राम के चरित्र में तो राम-रस जग को चखाय गये तुलसी.

आत्मा थी राम की पिता में सो प्रताप-पुंज आप रूप गर्भ में समाय गये तुलसी.
जन्मते ही राम -नाम मुख से उचारि निज नाम रामबोला रखवाय गये तुलसी.
रत्नावली-सी अर्धांगिनी सों सीख पाय राम सों प्रगाढ़ प्रीति पाय गये तुलसी.
मानस में राम के चरित्र की कथा को गाय राम-रस जग को चखाय गये तुलसी.

Tulsi Eulogy
(Lyrical Translation)

Tulsi wrote Manas when cast creed communal heat had hit on earth the humanity.
It was breez of first rain that was blown from Manas to save the community.
Each of us got such a beautyful thought in the form of Ram and his entity.
That whole world became fan of Ram and Ram brought in the world an unity.

It was soul of Ram in Atmaram that took birth in the form of Tulsi.
Since he spoke name of Ram at birth hence was named as Rambola Tulsi. 
From Ratnavali he got the attachment with Ram and he became saint Tulsi.
Wrote an epic the Manas to read which world knew the Ram such a great was Tulsi.

1 comment:

Neeraj Dwivedi said...

मानस में राम के चरित्र की कथा को गाय राम-रस जग को चखाय गये तुलसी.

Tulsi to mahan hain hi ..

Aap ka bhi aabhaar jo aapane tulsi ki mahtta itne sundar tareeke se hame chakhai.

Sadar Pranam